
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल, कोर्ट परिसर में वकीलों का कार्य बहिष्कार
अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 8 आरोपियों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। पुलिस ने विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत में आरोप पत्र पेश किया है। चार्जशीट दाखिल होने के बाद आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिलने की संभावना समाप्त हो गई है।
इस मामले की जांच स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा की गई थी। जांच के दौरान राम मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की गहनता से जांच की गई। SIT ने सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी में बताया था कि सीसीटीवी फुटेज की जांच में चढ़ावे की चोरी से जुड़ी 105 घटनाएं सामने आई हैं।
जांच में सामने आया कि कुछ आरोपी मंदिर में चढ़ावे के रूप में आने वाली नकदी की गड्डियों को कथित तौर पर जेब और जूतों में छिपाकर ले जाते हुए सीसीटीवी फुटेज में दिखाई दिए। SIT ने इन फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच को आगे बढ़ाया।
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस ने बुधवार को सभी आठ आरोपितों के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। पुलिस के अनुसार आरोप पत्र 75 हजार से अधिक पन्नों का है। पुलिस की चार्जशीट में टिन्नू यादव, करुणेश, मनीष, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, रमाशंकर, अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा समेत आठ आरोपितों के खिलाफ आरोपों का उल्लेख किया गया है। फिलहाल सभी आरोपित जेल में बंद हैं और मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी है।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद कोर्ट परिसर में विरोध
पुलिस की ओर से चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अयोध्या कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार कर विरोध शुरू कर दिया। अधिवक्ताओं का कहना है कि मामले से जुड़ी उनकी आपत्तियों को सुने बिना ही पुलिस ने अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया।
वकीलों ने मामले की जांच के दायरे को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चढ़ावा चोरी प्रकरण में राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
पूर्व पदाधिकारियों पर FIR की मांग
अधिवक्ताओं की ओर से राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करने की मांग की जा रही है। वकीलों का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच सभी संबंधित पक्षों की भूमिका को ध्यान में रखते हुए की जानी चाहिए।
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब मामले में अदालत की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। 8 आरोपियों के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र के आधार पर अदालत में सुनवाई आगे बढ़ेगी। वहीं, अधिवक्ताओं के विरोध और पूर्व पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर की मांग ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
